मार्च 2026 में मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। इसी वजह से भारत में भी पेट्रोल और डीजल की सप्लाई को लेकर लोगों के मन में चिंता बढ़ गई है।
हालांकि सरकारी रिपोर्ट और ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल भारत में तेल की कोई बड़ी कमी नहीं है। देश के पास पर्याप्त स्ट्रेटेजिक ऑयल रिजर्व (Strategic Oil Reserves) मौजूद हैं, जो कुछ समय तक देश की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं।
भारत के पास कितना तेल भंडार मौजूद है?
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भारत के पास इस समय 250 मिलियन बैरल से अधिक कच्चे तेल (Crude Oil) और पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार मौजूद है।
- यह स्टॉक देश की ऊर्जा जरूरतों को लगभग 7 से 8 हफ्ते (करीब 50-60 दिन) तक पूरा कर सकता है।
- इसके अलावा LPG गैस का लगभग 25-30 दिन का बफर स्टॉक भी मौजूद बताया जा रहा है।
इसका मतलब है कि अगर वैश्विक सप्लाई में अस्थायी समस्या आती है तो भी भारत के पास कुछ समय तक स्थिति संभालने के लिए पर्याप्त बैकअप है।
मिडिल ईस्ट तनाव क्यों बढ़ा रहा है चिंता?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से तेल (Crude Oil) आयात करता है।
- भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है।
- इस आयात का बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट के देशों से आता है।
सबसे अहम मार्ग है होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)।
- भारत के कुल तेल आयात का लगभग 40% से 60% हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है।
- अगर इस क्षेत्र में युद्ध या तनाव बढ़ता है तो तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा रहता है।
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल देखा गया है।
- वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत $115 से $120 प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
सरकार का क्या कहना है?
भारत सरकार और तेल मंत्रालय के अनुसार फिलहाल देश में तेल (Crude Oil) की कोई कमी नहीं है और स्थिति नियंत्रण में है।
सरकार ने कुछ अहम कदम उठाए हैं:
- सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अचानक बड़ी बढ़ोतरी से बच रही हैं।
- तेल आयात को विविध बनाने के लिए अमेरिका और वेनेजुएला जैसे देशों से भी तेल खरीदने की अनुमति दी गई है।
- इससे किसी एक देश या क्षेत्र पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है।
घरेलू उत्पादन क्यों बन रहा है चुनौती?
भारत में कच्चे तेल का घरेलू उत्पादन पिछले कई वर्षों से स्थिर या घटता हुआ देखा जा रहा है।
दूसरी ओर:
- देश में ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है।
- इसी कारण भारत को अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करना पड़ता है।
यही वजह है कि वैश्विक हालात में बदलाव होने पर भारत पर उसका असर जल्दी दिखाई देता है।
क्या भारत में तेल खत्म होने का खतरा है?
विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल भारत में तेल खत्म होने या भारी कमी जैसी स्थिति नहीं है।
- देश के पास 50-60 दिनों का रणनीतिक तेल भंडार मौजूद है।
- सरकार नए सप्लाई स्रोत और व्यापारिक समझौते तलाश रही है।
इसलिए अभी पेट्रोल-डीजल को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन वैश्विक हालात पर नजर रखना जरूरी है।
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